मृदा स्वराज: हमारी मिट्टी - हमारी ताकत (विश्व मृदा दिवस)
Published on May 16, 2026
Summary
यह पुस्तिका विश्व मृदा दिवस के अवसर पर किसानों को मिट्टी परीक्षण के सरल तरीकों की जानकारी देती है, जिसमें जैविक कार्बन, नमी, बनावट, और पीएच की जांच शामिल है ताकि मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सके।
विश्व मृदा दिवस - 5 दिसम्बर, 2025
मृदा स्वराज
हमारी मिट्टी - हमारी ताकत
स्वस्थ मृदा - समृद्ध धरती, खुशहाल गाँव व शहर का आधार
विश्व मृदा दिवस हर वर्ष मिट्टी के संरक्षण, उसके महत्व को जन-जन तक पहुंचाने के लिए मनाया जाता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि मिट्टी केवल उत्पादन का साधन नहीं, बल्कि एक जीवित और संवेदनशील संसाधन है, जिसकी सेहत हमारे पर्यावरण और जीवन की समृद्धि के लिए अनिवार्य है। हमारी पारंपरिक ज्ञान प्रणाली में मिट्टी की बनावट, रंग व गंध को देखकर उसकी ताजगी एवं पोषण समझने की सूक्ष्म कला छिपी है, जो विज्ञान के आधुनिक परीक्षण जैसे pH, NPK, जैविक कार्बन व माइक्रोन्यूट्रिएंट के आंकड़ों के साथ मिलकर मिट्टी की असली सेहत का सही चित्र रेखांकित करती है। जब हम स्थानीय अनुभवी ज्ञान और वैज्ञानिक विधियों को एक साथ शामिल करते हैं, तब ही मिट्टी के संरक्षण में संतुलित, विवेक पूर्ण व दीर्घकालिक सुधार संभव होता है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ धरती और खुशहाल जीवन की नींव रखता है।
मृदा के मूलभूत गुण व उनका स्थानीय विधियों द्वारा परीक्षण
मृदाकणाकार (Soil Texture)
मृदा में उपस्थित विभिन्न आकार के खनिज कण - जैसे बालू, सिल्ट तथा क्ले कणों के अनुपात को मृदा कणाकार कहते हैं। यह मृदा का पैतृक गुण है इसे कृषण क्रियाओं द्वारा बदला नहीं जा सकता है। मृदा कणाकार ज्ञात करने के लिए मेसन जार (Mason Jar) का उपयोग किया जाता है। मृदा विज्ञान में, मृदा में रेत, सिल्ट व क्ले के अनुपात के आधार पर मृदा को कुल 12 प्रकार की मिट्टियों में से वर्गीकृत किया गया है। इसमें से दोमट मिट्टी (Clay Loam) कृषि के लिए सर्वोत्तम है।
USDA के अनुसार 12 प्रकार की मिट्टी (Soil Texture Classes in Hindi)
क्र.सं. | मृदा का प्रकार | Sand % | Silt % | Clay % |
|---|---|---|---|---|
1 | रेतीली मिट्टी (Sand) | 85-100 | 0-10 | 0-10 |
2 | दोमट रेत (Loamy Sand) | 70-90 | 0-30 | 0-15 |
3 | बलुई दोमट (Sandy Loam) | 43-85 | 0-50 | 0-20 |
4 | दोमट मिट्टी (Loam) | 23-52 | 28-50 | 7-27 |
5 | गादयुक्त दोमट (Silt Loam) | 0-50 | 50-88 | 0-27 |
6 | गाद मिट्टी (Silt) | 0-20 | 80-100 | 0-12 |
7 | बलुई चिकनी दोमट (Sandy Clay Loam) | 45-80 | 0-28 | 20-35 |
8 | चिकनी दोमट (Clay Loam) | 20-45 | 15-53 | 27-40 |
9 | गादयुक्त चिकनी दोमट (Silty Clay Loam) | 0-20 | 40-73 | 27-40 |
10 | बलुई चिकनी मिट्टी (Sandy Clay) | 45-65 | 0-20 | 35-55 |
11 | गादयुक्त चिकनी मिट्टी (Silty Clay) | 0-20 | 40-60 | 40-60 |
12 | चिकनी मिट्टी (Clay) | 0-45 | 0-40 | 40-100 |
1. बोतल या जार परीक्षण विधि (Bottle/Jar Test)
खेत के किसी भी स्थान से लगभग 250 ग्राम मिट्टी का नमूना लिया जाता है। इस नमूने को एक पारदर्शी कांच या प्लास्टिक की बोतल में डालकर, उसमें पानी भर दिया जाता है। इसके बाद बोतल को अच्छी तरह हिलाकर मिश्रण बना लिया जाता है और फिर बोतल को बिना हिलाए 48 घंटे के लिए किसी सुरक्षित स्थान पर रख दिया जाता है। 48 घंटे बाद बोतल के अंदर मिट्टी के कण अपने आकार और भार के अनुसार अलग-अलग परतों में जम जाते हैं, जिन्हें स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। सबसे नीचे भारी और बड़े आकार के रेत (Sand) के कण जमा हो जाते हैं। उनके ऊपर सिल्ट (Silt) के कण, जिनका आकार और भार रेत और क्ले के बीच का होता है, एक परत बनाते हैं। सबसे ऊपर सबसे हल्के और सूक्ष्म कण-क्ले (Clay) की परत होती है।
2. बॉल या हथेली परीक्षण विधि (Feel Test Method)
इस परीक्षण में मिट्टी की बनावट का आकलन स्पर्श व अनुभव के आधार पर किया जाता है। इसके लिए खेत से थोड़ी नम मिट्टी लेकर उसे हथेली पर रखा जाता है। फिर उँगलियों के बीच उस मिट्टी को मसलकर एक लंबारोल (पट्टी) या बॉल (गेंद) बनाई जाती है। इस प्रक्रिया के दौरान मिट्टी की बनावट, उसकी चिकनाई, खुरदुरापन और लचीलापन को उँगलियों से महसूस किया जाता है। यदि मिट्टी खुरदुरी और किरकिराहट वाली महसूस हो तथा रोल या बॉल बनाते समय उसमें दरारें आएं और वह पट्टी या बॉल टूट जाए, तो उस मिट्टी में रेत की मात्रा अधिक मानी जाती है। यदि मिट्टी चिकनी लगे, लेकिन रोल या बॉल बनाते समय उस पर कोई स्पष्ट रेखाएँ न बनें और वह आसानी से बिखर जाए, तो उस मिट्टी में सिल्ट की मात्रा अधिक होती है। यदि मिट्टी चिकनी, मुलायम और लचीली हो, जिससे आसानी से रोल या बॉल बन जाए और उँगलियों से दबाने पर उस पर स्पष्ट रेखाएँ बनें तथा मिट्टी हथेली पर लिपटने लगे, तो उस मिट्टी में क्ले की मात्रा अधिकमानी जाती है।
मृदा रंग
लाल रंग की मिट्टी: इसमें मेग्नेटाइट (Magnetite) जैसे लोहे (Fe) के खनिज की उपस्थिति के कारण लाल रंग होता है।
पीले रंग की मिट्टी: इसमें हेमेटाइट (Hematite) खनिज की अधिकता के कारण पीला रंग होता है।
काली मिट्टी: इसमें जैविक पदार्थों की अधिकता होती है, जिससे मिट्टी का रंग गहरा काला हो जाता है।
मृदा pH का परीक्षण
मृदा के pH परीक्षण हेतु खेत के पाँच विभिन्न स्थानों - चार कोनों एवं मध्य भाग से 15 सेंटीमीटर गहराई तक V आकार का गड्डा खोदकर मृदा के नमूने (सेम्पल) एकत्र किए जाते हैं। इन सभी नमूनों को आपस में मिलाकर, चलनी की सहायता से छान लिया जाता है। छनी हुई मृदा को किसी समतल एवं साफ सतह पर फैला कर चार बराबर भागों में बाँटा जाता है।
इनमें से तीन भाग हटाकर केवल एक भाग रखा जाता है। यह प्रक्रिया तब तक दोहराई जाती है जब तक कि अंतिम सेम्पल 10-15 ग्राम का न रह जाए। इसके बाद, इसे 10-15 ग्राम मृदा सेम्पल को एक टेस्ट ट्यूब में डालकर उसमें 10 मिलीलीटर डिस्टिल्ड वाटर (शुद्ध जल) मिलाया जाता है, अच्छी तरह हिलाया जाता है। डिस्टिल्ड वाटर का उपयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि इसमें किसी प्रकार के खनिज लवण नहीं होते और इसकी pH 7 (उदासीन) होती है, जिससे मृदा सेम्पल की pH पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। जबकि सामान्य पीने या सिंचाई के जल में विभिन्न खनिज लवण होते हैं, जिनके कारण उनकी pH अम्लीय या क्षारीय हो सकती है, जो परीक्षण को प्रभावित कर सकती है।
जब मिट्टी और जल का विलयन (घोल) तैयार हो जाए, तब उसमें 2-3 बूंद pH अभिरंजक (pH Indicator) मिलाया जाता है तथा पुनः हिलाया जाता है। इससे विलयन का रंग बदल जाता है, जो गहरा नीला से लेकर गहरा लाल तक हो सकता है।
लाल रंग अम्लीयता को दर्शाता है।
नीला रंग क्षारीयता को दर्शाता है।
मृदा जैविक कार्बन का परीक्षण
मृदा में जैविक कार्बन की मात्रा निर्धारित करने हेतु, खेत के 5 विभिन्न स्थानों (चार कोने व मध्य) से 15 सेंटीमीटर गहराई तक V आकार का गड्डा बनाकर मृदा के नमूने एकत्र किए जाते हैं। सभी नमूनों को चलनी से छानकर किसी समतल सतह पर गोलाकार रूप में फैलाकर चार बराबर भाग बनाए जाते हैं। इनमें से तीन भाग हटा कर केवल एक भाग को रखा जाता है। यही प्रक्रिया तब तक दोहराई जाती है जब तक सेम्पल का भार 50 ग्राम न रह जाए। इसके बाद इस नमूने को एक कोनिकल फ्लास्क में डालकर उसमें 10 मी.ली. सोल्यूशन A मिलाया जाता है, अच्छी तरह हिलाया जाता है। फिर इसमें सोल्यूशन B मिलाकर पुनः अच्छी तरह मिलाने के बाद इस विलयन को 15 मिनट के लिए रखा जाता है।
फिर कोनिकल फ्लास्क में फिल्टर पेपर लगाकर विलयन को छान लिया जाता है। छने हुए विलयन को टेस्ट ट्यूब में डालकर उसके रंग की तुलना मृदा जैविक कार्बन स्केल चार्ट से की जाती है।
रंग के आधार पर मृदा की स्थिति
यदि विलयन का रंग गहरा भूरा या काला हो - मृदा में जैविक कार्बन पर्याप्त मात्रा में है, जैविक खाद डालने की आवश्यकता नहीं।
यदि रंग हल्का भूरा या मध्यम भूरा हो - जैविक कार्बन मध्यम मात्रा में है, कम मात्रा में जैविक खाद डालने की आवश्यकता।
यदि रंग धूसर या मटमैला हो - जैविक कार्बन अत्यल्प मात्रा में है, अतः तत्काल जैविक खाद डालना आवश्यक है।
मृदा नमी परीक्षण
मृदा नमी का परीक्षण इलेक्ट्रोनिक नमी मीटर द्वारा किया जाता है। इस मीटर में दो सुइयाँ (प्रोब) होती हैं, जिन्हें मृदा में लगभग 1 फीट गहराई तक धँसाया जाता है। इसके बाद मीटर का बटन चालू कर 15 सेकंड तक प्रतीक्षा करें।
फिर मीटर पर लगी सांकेतिक बत्ती (Indicator Light) का अवलोकन करें, जो मृदा की नमी की स्थिति को दर्शाती है।
बत्ती का रंग | मृदा नमी स्थिति | सिंचाई की आवश्यकता |
|---|---|---|
🔵 नीला | पर्याप्त नमी | सिंचाई की आवश्यकता नहीं। |
🟢 हरा | उचित नमी | अभी सिंचाई करना आवश्यक नहीं। |
🟠 नारंगी | कम नमी | सिंचाई करना उपयुक्त रहेगा। |
🔴 लाल | अत्यधिक कम नमी | तुरंत सिंचाई करना आवश्यक। |