A Guide to Early Summer (Zaid) Vegetable Farming for Higher Profits
Published on August 7, 2026
Summary
This agricultural guide discusses early (Ageti) farming for the Zaid (summer) season to maximize profits. An expert explains cultivation techniques for high-demand vegetables like cucumber, kakdi, bitter gourd, and bottle gourd, focusing on proper timing, spacing, and seed preparation.
Introduction
कार्यक्रम खेतीवाड़ी हमार वरा हमरा भाई-बहनो ने आपनी बहन अंजली नु राम-राम। किसान भाई-बहनो, आप सुन रहे हो आपनो सामुदायिक रेडियो, वागड़ रेडियो 90.8 FM माते। ने आप सब नु घणी मान स्वागत कर हा हमारे आज ने कार्यक्रम खेतीवाड़ी में। जेम की किसान भाई-बहनो, आप जाणो सो के अमे हमारे टाइम माते हाजिर थेई जा हा कार्यक्रम खेतीवाड़ी ने लईने एक नवा विषय ने हाथे। तो किसान भाई-बहनो, आजे हमारे कार्यक्रम में आप तक की बातचीत नो विषय है के आज जे जायद नो मौसम आबा वालो है, ऐने पेले आपणे अगेती खेती करा हा। तो एवी कई फसलें हैं, कई एवी सब्जियां हैं जेणानी आपणे अगेती खेती करी शका, इ हंगरी वाते आजे आपणे कार्यक्रम में करवा वारा हा। तो अणा विषय माते वाते तो आपणी घणा कने थईंगा कार्यक्रम ने माध्यम तकी, पण कार्यक्रम नी शुरुआत में आप सबने हमरावी दा गीत ने मोरे करा आपणी वाते। तो किसान भाई-बहनो, आप हांभरता रेजो आपणु रेडियो, आपणी वाते, वागड़ रेडियो 90.8 FM माते।
Song 1
(Musical Intro)
ओ थारो केसरिया रो पाग सुहावणो रे ओ थारो केसरिया रो पाग सुहावणो रे ओ थारो लाल रंगे जामो मन भावनो रे ओ थारो लाल रंगे जामो मन भावनो रे ओ थारो केसरिया रो पाग सुहावणो रे ओ थारो केसरिया रो पाग सुहावणो रे
(Music)
ओ थारी आखड़ली लागे सावण काली कामणगारी ओ थारी आखड़ली लागे सावण काली कामणगारी ओ थारी दांतारी बत्तीसी मने घणी लागे प्यारी ओ थारी दांतारी बत्तीसी मने घणी लागे प्यारी ओ अस्तु सुन्दर सोहवे आज म्हारो सांवरो रे ओ अस्तु सुन्दर सोहवे आज म्हारो सांवरो रे ओ थारो केसरिया रो पाग सुहावणो रे ओ थारो केसरिया रो पाग सुहावणो रे
(Music)
ओ थारा पाग मला पेच जाणे पनरा गोडा एक ओ थारा पाग मला पेच जाणे पनरा गोडा एक ओ थारी लाल-लाल अंगरखी गोटा चमके छैल अंगरखी ओ थारी लाल-लाल अंगरखी गोटा चमके छैल अंगरखी ओ थारी कानारी मोरखिया रा मोती सोवणा रे ओ थारे हिवड़े रा मादलिया मन मोहवणा रे ओ थारो केसरिया रो पाग सुहावणो रे ओ थारो केसरिया रो पाग सुहावणो रे
Expert Discussion on Early Zaid Farming
जिम की हमें आपने गीत तकी पेले विषय बताड़ी दीधु थू के आजे आपणे बातचीत करवा वारा हा के जायद ना मौसम में आपणे कई एवी सब्जियां हैं जेणानी अगेती खेती करी शका। तो अणा विषय माते जानकारी आलवा बल्ले आजे आपणे स्टूडियो में पधारे तका हैं प्रशांत सर। तो सब तकी पेले आपणे हामरी ले अणानी वाते ने मोरे करा आपणी वाते।
Host: सर, नमस्कार।
Expert: जी, नमस्कार।
Host: सर, आपका बहुत-बहुत स्वागत करते हैं हमारे वागड़ रेडियो परिवार में।
Expert: धन्यवाद अंजली जी।
Host: सर, जैसा कि कार्यक्रम खेतीवाड़ी में हमारे जो सभी किसान भाई-बहन हैं, वह अच्छी तरीके से जानते हैं कि हम खेती से जुड़ी विशेष जानकारी उनको कार्यक्रम के माध्यम से देते हैं। तो आज भी कार्यक्रम में हमारी आपसे बातचीत का विषय है गर्मियों में अगेती जो खेती हम करते हैं, उसमें हम कौन-कौन सी फसलों को ले सकते हैं? क्योंकि हम देखते हैं कि अगेती जो खेती होती है उसके माध्यम से हम बहुत अच्छी तरीके से मुनाफा कमा लेते हैं और अगेती खेती में कौन-कौन सी फसलें हम कर सकते हैं, ये ढेर सारी जानकारी हम हमारे श्रोता साथियों को देते हैं। तो आज भी कार्यक्रम में हम यही जानेंगे कि गर्मियों का जो मौसम आने वाला है तो उसमें अगेती खेती में हम कौन-कौन सी फसलों का चयन कर सकते हैं?
Expert: सभी किसान भाइयों और बहनों को मेरा राम-राम। साथियों, जैसे कि अगेती खेती पर हम लोगों ने बरसात के समय में, ठंड के समय में बात किया था। वैसे ही अगेती खेती अगर हमें जायद के सीजन में अर्थात गर्मियों के मौसम में करना है तो उसके लिए तैयारियां और काम करना हमें अभी से शुरू करना होगा। जैसा कि हम सब जानते हैं कि हमारी रबी की जो फसलें हैं, खासतौर से जो गेहूं है, चना है, वह अभी 40 से लेकर 60 दिन तक, जिन्होंने जल्दी बुवाई करी है उनकी 70 दिन तक की अवधि पूरी कर चुकी है और आगामी एक से डेढ़ माह में यह दोनों फसलें पक कर तैयार हो जाएंगी और हम कटाई कर सकते हैं।
अगर अगेती खेती के संबंध में हम बात करें, सबसे ज्यादा कमाई का एक साधन अगर कुछ बन सकता है तो वह अगेती खेती है। अगेती खेती कोई खेती का नया तरीका नहीं है, बस इसमें इतना ध्यान हमें रखना है कि जो हम फसल लेना चाहते हैं, हम हमारे द्वारा उत्पादित फसल को सबसे पहले बाजार में पहुंचा सकें। इसके लिए हमें थोड़ा जो मौसम होता है, उसके पहले बुवाई करना होती है। यह बुवाई खुले खेत में की जा सकती है, यह बुवाई नर्सरी बनाकर भी की जा सकती है। मेरी किसान भाइयों और बहनों को सलाह है कि अगर वह अगेती खेती अपनाकर अधिक लाभ कमाना चाहते हैं तो वे अपने खेत के ही एक हिस्से में छोटी सी नर्सरी स्थापित करें और वहां पर वह अगेती खेती करना शुरू कर सकते हैं।
तो आइए जायद सीजन में, अब आप सभी का अधिक समय न लेते हुए मैं आपको बताना चाहूंगा कि जायद का जो मौसम है, इस दौरान सब्जियों के भाव आसमान छूते हैं। जरा आप भी याद करिए कि अप्रैल-मई की गर्मियों में हम देखते हैं कि ज्यादातर जो सब्जियां होती हैं वह ₹80 किलो, ₹100 किलो, ₹150 किलो तक में बिकती है। न्यूनतम 1 किलो सब्जी का भाव भी ₹40 किलो से कम नहीं होता है। तो ऐसी परिस्थितियों में हमारे किसान भाइयों को ज्यादा मुनाफा मिले, इसके लिए अगेती खेती में मेरी सलाह है कि जायद के मौसम में हमारे किसान भाई और बहन सब्जियों की खेती करें। यह खेती आप अपने पास में जो उपलब्ध संसाधन हैं, जैसे कि पानी, बीज, अपना देसी घरेलू बीज और पानी और खाद, इसके आधार पर एक बीघा, दो बीघा या आधा बीघा से शुरू कर सकते हैं।
1. Cucumber (खीरा)
जैसा मैंने बताया कि इस मौसम में सब्जियों की खेती अगर हम करते हैं तो अधिक लाभ ले सकते हैं। तो सबसे पहला जो गर्मियों का सीजन जब शुरू होता है तो सबके मन में जो पहला सब्जी का नाम अगर याद करते हैं तो ककड़ी खाना या खीरा खाना सभी पसंद करते हैं। और खीरे में चूंकि पौष्टिक तत्व भी मतलब फाइबर की मात्रा भी अधिक होती है, रेशेदार सब्जी है, दूसरा उसमें पानी भी भरपूर होता है, इसलिए बाजार में इसकी मांग भी ज्यादा होती है। तो खीरा की खेती को हम जायद की अगेती खेती के रूप में अपना सकते हैं। इसके लिए किसान भाइयों और दीदियों को सलाह है कि वे खेत में ही अपने क्यारियां बनाना शुरू कर सकते हैं और जो खीरे के जो बीज हैं उनकी बुवाई लाइन से लाइन में ही करना है, अर्थात एक कतार से दूसरी कतार में हमें बुवाई करनी है। कतार से कतार के बीच की जो दूरी होना चाहिए वह कम से कम एक से डेढ़ मीटर की दूरी रखना चाहिए क्योंकि जो खीरे का जो बेल है, वह लता है और वह बहुत ही बड़ी मात्रा में फैलती है। इसलिए कम से कम हमें जो दो कतारें हैं उनके बीच डेढ़ मीटर की दूरी रखना चाहिए और एक पौधे से पौधे, अगर एक बीज हमने यहां लगाया है तो कम से कम एक से सवा मीटर की दूरी पर दूसरा बीज हमें लगाना चाहिए। तो इस अंतराल में अगर हम बुवाई करते हैं तो हमारी बेलों को फैलने के लिए पर्याप्त स्थान मिलता है, उसमें फूल भी अच्छी मात्रा में आते हैं और जो बेल के गलने की संभावना होती है वह भी नियंत्रित हो जाती है। इसलिए सभी से अनुरोध है कि वे दूरी का विशेष ध्यान रखकर कार्य करें। बुवाई के बाद में जब हम खीरा बो देते हैं तो उसके 20 से 25 दिन के बाद में उसकी पहली निदाई-गुड़ाई करने का काम भी हमें करना होगा। यह निदाई-गुड़ाई भी हम हमारी भौतिक मतलब हाथों से ही कर सकते हैं या कुदाली लेकर भी हम लोग उसकी कर सकते हैं। जो यह शुरुआती एक महीना है मतलब कि आपका फरवरी में अगर आपने बीज बोया है तो मार्च तक का जो समय है यह अवधि फसलों को नुकसान पहुंचाने में भी ज्यादा होती है क्योंकि यह जायद का बीज है और हम ठंड के, चूंकि इस समय सुबह और शाम ठंड होती है तो इसलिए हमें इस फसल का ध्यान भी रखने की जरूरत है। इसलिए आप लोगों को सलाह है कि खेत में हमें सफाई रखना है, मतलब वहां पर अनावश्यक कचरा या पेड़-पौधों के अवशेष नहीं होना चाहिए। साथ ही तापमान बढ़ने पर हल्की सिंचाई करने की भी हमारे को जरूरत है। यह इसलिए कि जो मिट्टी है उसमें पर्याप्त नमी के साथ-साथ में गर्माहट भी बनी रहे। यदि पर्याप्त गर्माहट होगी तो बीजों को अंकुरण में आसानी होगी। बीज आसानी से अंकुरित हो पाएंगे। तो इस प्रकार हमारा बीज खराब नहीं होगा। तो इन दो बातों का ध्यान रखने की जरूरत है।
2. Kakdi (ककड़ी)
खीरा में ही जैसे एक ककड़ी है जिसकी बुवाई कर कर भी हमारे किसान भाई अच्छा लाभ ले सकते हैं। यह थोक में भी ₹35 से लेकर ₹60 किलो तक इसकी बिक्री जायद के समय में देखी गई है। और सामान्यतः ककड़ी की जो हम बुवाई करते हैं अगेती के रूप में वह फरवरी-मार्च इसके लिए सबसे उत्तम माह है। अगर हम फरवरी में इसकी बुवाई करते हैं तो आगामी एक माह तक, एक से डेढ़ माह तक बेल की वृद्धि अच्छे से होती है, फूल वगैरह अच्छे से लगना शुरू हो जाते हैं और मार्च के अंत तक में हमारी ककड़ी की जो पहली तुड़ाई है वह हम बाजार लेकर जा सकते हैं। तो अप्रैल की शुरुआत में ही हमारी पहली फसल के रूप में हम इसको ले जाने में सक्षम होते हैं।
अगर ककड़ी की फसल को अगर हम लोग नर्सरी में तैयार करें तो ज्यादा उपयोगी होगा। इसके लिए नर्सरी में हम बेड बना लें और आप चाहे तो जो पानी के जो ग्लास हैं उसके अंतर्गत आप बीज की बुवाई कर सकते हैं। इससे कम स्थान में अधिक पौधों की वृद्धि ले सकते हैं। आपका बीज भी नहीं बिगड़ेगा, आपका स्थान भी नहीं बिगड़ेगा और इनको आसानी से पौधे को अगर हमें खेत में प्रत्यारोपित करना है तब हम आसानी से ग्लास को जो हमारा जो चाय का या पानी का जो ग्लास है, उसको हम ले जा सकते हैं और उसमें से उसको फाड़ कर हम पूरा का पूरा पौधे को खेत में प्रतिस्थापित कर सकते हैं। तो इस प्रकार से मेरी सलाह है कि किसान भाई अपने खेत के एक भाग में क्यारी बना लें, उसमें नर्सरी तैयार करें और नर्सरी में चाय के या पानी के जो ग्लास हैं उनमें ककड़ी की पौध तैयार कर सकते हैं।
दूसरा यह जो ककड़ी की फसल है यह हर प्रकार की भूमि के लिए सबसे अच्छी होती है मतलब यह हर भूमि में उत्पादित की जा सकती है और एक एकड़ में लगभग-लगभग 1 किलोग्राम के लगभग ककड़ी का बीज हम आसानी से लगा सकते हैं। और इसकी जो दूरी होना चाहिए तो जैसे हमने खीरा में 1.5 मीटर की दूरी रखी थी तो उसी प्रकार हमें ककड़ी में कम से कम 2 मीटर की दूरी रखनी चाहिए। साथ ही जो पौधे से पौधे की दूरी है वह भी हम लोग 1 मीटर के लगभग रखते हैं। अब जैसे खीरा में हमने एक से दो बीज एक स्थान पर डाले थे तो ककड़ी में इसका अंकुरण थोड़ा सा कठिन रहता है इसलिए किसान भाइयों को सलाह है कि एक स्थान पर जहां हम बीज बो रहे हैं वहां पर कम से कम दो से तीन बीज बोएं और जब बीज अंकुरित हो जाए तो अतिरिक्त बीज को हटा सकते हैं, उस पौधे को हम वहां से हटाकर दूसरी जगह प्रत्यारोपित कर सकते हैं। तो यह तरीका अपनाकर हम लोग ककड़ी की खेती को आसानी से हम कर सकते हैं।
अगर इसमें खाद की बात करें तो सबसे बेहतर और उत्तम खाद हमारी गोबर की देसी खाद है। आप इसमें वर्मी कंपोस्ट अगर आपके पास उपलब्ध है तो वर्मी कंपोस्ट भी आप उसमें मिलाकर दे सकते हैं जो कि दोनों फसलों के लिए, खीरे के लिए और ककड़ी के लिए पर्याप्त वृद्धि में सहायक होती है।
3. Bitter Gourd (करेला)
एक और सब्जी जो गर्मियों में सबसे ज्यादा पसंद की जाती है वह है करेले की सब्जी। करेला भी लता वर्गीय फसल है और जो अपने खेत जिनमें दोमट मिट्टी की मात्रा अधिक है, उन खेतों में हमें करेला की खेती करना चाहिए। करेले की बुवाई दो तरीके से की जा सकती है, एक तो सीधा बीज बोकर और दूसरा है पौधे से। हमारे क्षेत्र में बीज से पौध तैयार करने की विधि सबसे ज्यादा प्रचलित है तो हम यह तरीका अपना सकते हैं। करेले की खेती में दो से तीन बीज 2.5 से 5 मीटर की दूरी पर, मतलब अगर हम एक बीज से दूसरे बीज की दूरी देखें तो हमें 0.75 मीटर से लेकर 1 मीटर तक की दूरी, मतलब 1 मीटर तक की दूरी अगर हम लेंगे तो इस पर अगर हम बुवाई करेंगे तो हमारे करेले के लिए बेहतर रहता है। दूसरा बीज को बोने से पहले हमें, चूंकि करेले का जो बीज होता है वह उसका जो आवरण है वह ठोस होता है तो उसको बोने से पहले हर बीज उगे, इसको सुनिश्चित करने के लिए एक आसान तरीका है कि जो हम करेला बीज बोने जा रहे हैं उसको पहले 24 घंटे पहले हम लोग पानी में भिगो देते हैं। तो इसको भिगोने से क्या होता है कि जो आवरण है वह मुलायम हो जाता है, नर्म हो जाता है और आसानी से जो बीज है वह अंकुरित हो पाता है। नदी के किनारे वाली जमीन करेले की खेती के लिए सबसे बेहतर होती है। कुछ दूसरी जमीन जहां पर पानी का बहाव अधिक होता है, जैसे नाले की कोई जमीन है या फिर आपका जो निस्तार तालाब, जो तालाब के पास की जमीन है, वहां पर भी करेले की खेती करेंगे तो हमें ज्यादा लाभ मिल जाता है। और इसे भी सामान्य तरीके से करना है, गोबर की खाद जो आप अपने खेत में परंपरागत रूप से खेती करते हैं उसी तरीके से करेले की खेती को भी किया जा सकता है।
4. Bottle Gourd (लौकी)
एक और सब्जी है जो लता वर्गीय में जिसके भाव काफी अच्छे आते हैं, हर कोई व्यक्ति इसे खाना पसंद करता है। तो वह है लौकी की सब्जी। तो लौकी की खेती के लिए सबसे बढ़िया जो मिट्टी है वह जैसे मैंने बताया था कि करेले के लिए दोमट मिट्टी अच्छी होती है, उसी प्रकार लौकी के लिए भी दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है। लौकी की खेती के लिए एक हेक्टेयर में अगर हम बात करें तो 4.5 किलोग्राम के लगभग बीज की जरूरत होती है और अगर हम इसको बीघा में देखें तो हमें करीबन 750 से 1 किलोग्राम के लगभग बीज पर्याप्त मात्रा में हो जाता है। लौकी के खेती के लिए भी आप सभी को सलाह है कि उसके बीज को बोने से पहले 24 घंटे तक हमें पानी में भिगो देना चाहिए और भिगो देने के बाद में टाट में लपेटकर बीजों को रख देते हैं। इससे यह होता है, टाट में अगर हम बीजों को 24 घंटे के लिए रख देते हैं तो लौकी का जो आवरण है बीज का, वह आसानी से खुल जाता है, गल जाता है और बीज को उगने में या अंकुरित होने में आसानी होती है। लौकी की जो बीज रहते हैं उनको अगर हम 2.5 से 3 मीटर की दूरी पर हम बुवाई करेंगे तो ज्यादा लाभदायी होगा। यहां पर दूरी का बहुत ही महत्व है। इसलिए किसान भाइयों को सलाह है कि वह आप इसे सुनकर दर्ज भी कर लें कि 2.5 से 3 मीटर की दूरी पर हमें लौकी का बीज बोना है और जो बुवाई की गहराई है वह कम से कम 50 सेंटीमीटर तक हमें रखनी होगी। और इनकी गहरी बुवाई करने के बाद में खेत में हम नाली बना सकते हैं और नालियों के मध्य में हम बुवाई करें। बुवाई करने के बाद में नियमित अंतराल पर हमें सिंचाई करनी होगी, हल्की सिंचाई करने के लिए मेरी आप सभी को सलाह होगी और इस प्रकार से हम अगर सिंचाई करते हैं तो एक बीघा से आसानी से 30 से 40 हजार रुपए की आय लौकी के माध्यम से कमा सकता है। तो यह हमारी जो मुख्य फसलें हैं, रबी की फसल, हमारी जो बरसात की जो फसलें हैं, उससे अधिक जायद की अगेती फसलें लाभ देने वाली होती हैं।
Host: जी बिलकुल।
Expert: किसान भाइयों को अपनी दैनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, अपनी आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सलाह है कि वे अगेती खेती को अधिक से अधिक मात्रा में अपनाएं। कम से कम आधे से एक बीघा कृषि भूमि में आप इसकी शुरुआत कर सकते हैं और आप देखेंगे कि निश्चित ही अगेती खेती आपके जीवन में सकारात्मक रूप से आर्थिक परिवर्तन लेकर आएगी, लाभ देकर जाएगी।
Host: जी बिल्कुल। तो सर, जैसा कि आज कार्यक्रम में हम आपसे बहुत अच्छी बातें जान पा रहे हैं कि किस तरीके से जायद की खेती में हमारे जो किसान भाई-बहन हैं, वह कौन सी ऐसी फसलें हैं जो अगेती खेती के रूप में चुन सकते हैं। तो जैसा कि बहुत सारी फसलों के बारे में हम जान चुके हैं, आगे और भी कुछ ऐसी फसलें हैं हम अगेती खेती के रूप में चुन सकते हैं, उन फसलों के बारे में सर हम अगले हमारे कार्यक्रम में जानेंगे क्योंकि समय सीमा को भी हमें ध्यान में रखना होता है। तो सर, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं कि आप हमारे स्टूडियो में पधारे और इतनी अच्छी जानकारी से आपने हमें अवगत करवाया।
Expert: धन्यवाद।
Host: जिम की किसान भाई-बहनो, अवडे आपणे वेस में प्रशांत सर जुड़े तका हता ने अणाये आपणा ने घणी असल तरीका तकी बताड़ी दीधु है के अगेती खेती ने रूप में आपणे कई-कई सब्जियां नु चयन करी शका। तो आशा करा हा के आ हंगरी वाते आपने गमी होंगा। केम के हवे आपणे देखी रहा के टाइम थेई गयो है आपणे अणस कार्यक्रम तकी सुटा पाड़वानो। तो सुटा तो पेड़ा पण साथे पेले हामरी ले एक और गीत ने मोरे पेड़ा सुटा।
Song 2
(Musical Intro)
ओ दड़ बादली रो पाणी सैया, कुण तो भरे दड़ बादली रो पाणी सैया, कुण तो भरे मैं तो भरा म्हारी गोरादे भरे मैं तो भरा म्हारी सहेल्या भरे दड़ बादली रो पाणी सैया, कुण तो भरे दड़ बादली रो पाणी सैया, कुण तो भरे
(Music)
कीण जी खुदाया मादा नाडिया बा दिला रे कीण जी खुदाया मादा नाडिया बा दिला रे हाजी ढोला कीण जी खुदाया है तळाव दड़ बादली रो, ओ दड़ बादली रो पाणी सैया, कुण तो भरे दड़ बादली रो पाणी सैया, कुण तो भरे
(Music)
पीतळ पीतळ रो म्हारो बेवड़ो म्हाराजा रे पीतळ पीतळ रो म्हारो बेवड़ो म्हाराजा रे हाजी कोई पातळ सी पनिहार दड़ बादली रो, ओ दड़ बादली रो पाणी सैया, कुण तो भरे दड़ बादली रो पाणी सैया, कुण तो भरे
(Music)
सात सहेल्या रो झूलरो बा दिला रे सात सहेल्या रो झूलरो बा दिला रे हाजी मैं तो पाणीड़े ने गई रे तळाव दड़ बादली रो, ओ दड़ बादली रो पाणी सैया, कुण तो भरे मैं तो भरा म्हारी गोरादे भरे मैं तो भरा म्हारी सहेल्या भरे दड़ बादली रो पाणी सैया, कुण तो भरे दड़ बादली रो पाणी सैया, कुण तो भरे
Conclusion
भाई-बहनो, अणस गीत हाथे कार्यक्रम खेतीवाड़ी तकी पेड़ा सुटा। आपने हमारा आज नो आ कार्यक्रम केवो लाग्यो? ऐने बारे में आप राय-सुझाव अमने आली शको हमारे अणा पता माते। हमारू पतू है कार्यक्रम खेतीवाड़ी, वागड़ रेडियो 90.8 FM, मुकाम पोस्ट कोपड़ा, वाग्धारा कैंपस, बांसवाड़ा, राजस्थान। हमारू पिन कोड नंबर है 327001। अजी वधारे जानकारी बल्ले आप अमने फोन करी शको हमारे अणा फोन नंबर माते। हमारू फोन नंबर है 9460051234। तो भाई-बहनो, फिरी मुलाकात थागा हमारी आप तकी अणस कार्यक्रम में, अणस टेम माते, एक नवा विषय ने हाथे। तारुदी, राम-राम, राम-राम।
(Outro Music)