Empowering Women Through Small Businesses for Self-Reliance
Published on August 7, 2026
Summary
This discussion focuses on empowering women through small-scale businesses. It highlights how local ventures like vegetable farming, food processing, and handicrafts not only provide financial independence but also boost self-confidence and societal respect for women, encouraging self-reliance.
नमस्कार! आपका बहुत-बहुत स्वागत करते हैं हम वागड़ रेडियो परिवार में। जैसा कि मैम आज आप हमारे कार्यक्रम घूमर से जुड़ रही हैं और आज हमारे कार्यक्रम में आपसे बातचीत का विषय है, छोटे व्यवसाय से आत्मनिर्भर बनती महिलाओं को लेकर। हम देखते हैं कि महिलाएं उनके जीवन में कोई भी कार्य करें, लेकिन उन्हें आत्मनिर्भर होना बहुत जरूरी है। जब तक महिलाएं खुद के पैरों पर खड़ी नहीं होती हैं, खुद से कुछ छोटे-मोटे व्यवसाय नहीं करती हैं, तब तक वह आर्थिक स्थिति में परिवर्तन नहीं ला सकती हैं। तो आज कार्यक्रम में आप हमें सबसे पहले यही बताइए कि कौन से ऐसे छोटे व्यवसाय हैं जो महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हैं?
जी धन्यवाद! तो अभी देखा जाए वर्तमान स्थिति में तो काफी बदलाव, वो भी सकारात्मक बदलाव हमें देखने को मिलते हैं। पहले कई महिलाएं सोचती थी कि वे केवल घर के काम तक ही सीमित हैं, घरेलू काम करना ही उनकी जिम्मेदारी है। लेकिन अब धीरे-धीरे वो अपने हुनर को पहचान रही है, वो क्या आगे कर सकती है, तो उन्होंने शुरुआत की है छोटे-छोटे व्यवसाय को लेकर। तो हमारे गांव में, हमारे समुदाय में, हमारे आस-पड़ोस में हम अगर देखें तो महिलाएं सब्जी उगाकर उन्हें बेच रही है, कुछ महिलाएं बकरी पालन, मुर्गी पालन, इस तरह के व्यवसाय भी वो कर रही है। कुछ महिलाएं घरेलू ही रहकर अपने पापड़, अचार, इसके माध्यम से भी वो बनाकर वो अपने मार्केट में जाकर उसको बेचती है। तो इसके अलावा कई महिलाएं जंगल से मिलने वाले उत्पाद हो सकते हैं जिसमें महुआ बोलें, लकड़ी बोलें, तो उसके माध्यम से भी वो अच्छी आय फिलहाल में कमा रही है। तो वर्तमान स्थिति में यदि देखा जाए तो काफी बदलाव महिलाओं के अंदर व्यवसाय को लेकर देखा गया है।
बिल्कुल सृष्टि जी आपने सही कहा और यह सुनकर बहुत अच्छा लगा कि महिलाएं अपने आसपास उपलब्ध जो संसाधन हैं उनका प्रयोग कर-कर आगे बढ़ रही हैं। यहीं अब मैं जानना चाहूंगी कि कोई ऐसा उदाहरण है जो आप हमारे श्रोता साथियों के साथ शेयर करें जिससे वह भी प्रेरित हो सकें इन सारी चीजों को लेकर?
जी बिल्कुल। तो मैं एक छोटी सी कहानी के रूप में आपको बताना चाहूंगी कि हमारे गांव में एक महिला है सुनीता नाम से। तो वो महिलाएं घर का ही काम करती थी पहले और उसके पास कोई अपनी आय नहीं थी, एक ऐसा स्त्रोत जिससे वो खुद कमा सके। वो पूरा परिवार मजदूरी पर ही निर्भर था। लेकिन एक दिन महिला ने यह सोचा कि हमारे समुदाय में एक बैठक होती है तो वहां जाकर उसने उसमें भाग लेना शुरू किया। तो वहां जाकर उसे पता चला कि महिलाएं वहां पर आपसी बातों को साझा करती है, नई बातें सीखती है, क्या करना चाहिए आगे, तो वहां पर वो चर्चाएं वहां पर होती है। तो उसी चर्चा के अंदर यह बात निकली कि जो सुनीता है, उनके घर के आसपास काफी जमीन है जिस पर वो सब्जी उगा सकती है। तो इसी शुरुआत को लेते हुए सुनीता ने सोचा कि क्या मैं यह काम कर सकती हूं? उसे काफी डर लगा लेकिन हिम्मत करते हुए उसने सब्जी को उगाना शुरू किया। तो वहां पर उसने अपने घर के आसपास ही एक छोटी सी वाड़ी, सब्जी वाड़ी बोल सकते हैं, तो उसको वहां पर शुरुआत की। धीरे-धीरे सब्जियां अच्छी होने लग गई। तो पहले तो उन्होंने अपने पड़ोस में या अपने परिवार के लिए ही इस्तेमाल किया और इसके साथ में जब सब्जियां ज्यादा होने लग गई और उन्होंने यह सोचा कि क्यों ना मैं इसको बेचूं। तो बाजार में जाकर उन्हें बेचना शुरू किया। कुछ ही महीनों में उनकी जो आय है उससे बढ़ने लग गई। तो वही आय को उन्होंने मदद लिया, एक घर के खर्चों में कैसे वह सहयोग कर सके। सबसे बड़ी बात यह है कि अब सुनीता अपने काम पर गर्व भी कर रही है और उसे आत्मविश्वास है कि हां, यदि मैं कोई काम करूंगी तो मैं उससे अपने परिवार का गुजारा तो कर ही सकती हूं।
बिल्कुल आपने सही कहा और वाकई में यह जो कहानी है, अगर हमारी जो महिलाएं हैं, वे सुनेंग तो वे अपने जीवन में इससे बहुत अच्छी प्रेरणा ले सकती हैं। और इस कहानी से हम यह समझ भी पा रहे हैं कि जब एक महिला छोटा सा कदम उठाती है तो वह आगे चलकर बड़ा बदलाव भी ला सकती है। तो जैसा कि बदलाव को लेकर हम बात कर रहे हैं और महिलाओं के छोटे व्यवसाय वे कैसे शुरू कर सकती हैं, उनको लेकर बात कर रहे हैं। तो अगर कोई महिला छोटा व्यवसाय शुरू करती है तो उसके जीवन में क्या सकारात्मक बदलाव आते हैं?
जी। तो यदि हम देखें कि कोई महिला एक शुरुआत करती है छोटे स्तर से तो वो जो स्तर है उनके जीवन में एक सकारात्मक पहलू को लेकर आता है, एक सकारात्मक बदलाव को लेकर आता है। सबसे पहले वो आर्थिक रूप से मजबूत बनती है और कहीं ना कहीं महिलाएं उस पैसों का योगदान अपने घरेलू कार्य में, घरेलू खर्चे में ही करती है। दूसरा बदलाव यह भी होता है कि उसमें एक आत्मविश्वास बढ़ता है कि हां, मैं अपने परिवार के लिए, अपने स्वयं के लिए कुछ कर सकती हूं। वो मेहनत से कुछ कमाती है तो उसे लगता है कि हां, वो कुछ भी कर सकती है। और यही कुछ भी करने को लेकर वो आगे बढ़ती रहती है। और धीरे-धीरे परिवार में, समाज में उसकी पहचान तो बनती ही है और इसके साथ ही लोग सम्मान भी देते हैं।
बिल्कुल आपने सही कहा। तो जैसा कि हम बात ही कर रहे हैं कि किस तरीके से महिलाएं जब खुद के व्यवसाय करती हैं तो कुछ सकारात्मक बदलाव ला सकती है। यहीं अब मैं जानना चाहूंगी कि जब महिलाएं समूह में मिलकर काम करती है तो क्या बदलाव तेजी से हमें दिखाई देते हैं?
जी हां। क्योंकि महिलाएं जब समूह में बैठें, बातचीत करेंगी तो कहीं ना कहीं वो एक दूसरे का सहारा बनती है, एक दूसरे को समझती है, एक दूसरे के अनुभव साझा करती है, नई बातें सीखती है, एक दूसरे को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित भी करती है। तो वहां पर यह जरूरी है कि जब महिलाएं आपसी बातचीत हो रही है तो अन्य जो महिलाएं हैं वो सही जानकारी, एक सही प्रशिक्षण, एक सहयोग समूह का मिलता है तो काम काफी अच्छी तरीके से महिलाएं आगे बढ़कर कर सकती है।
बिल्कुल आपने सही कहा। तो जैसा कि हम महिलाओं के व्यवसाय को लेकर बात कर रहे हैं तो आपकी नजर में कोई ऐसे व्यवसाय हैं जो महिलाएं कर सकती हैं?
जी बिल्कुल। यदि देखा जाए हम बात करते हैं एक गांव के क्षेत्र को लेकर तो वहां पर हम देखते हैं कि महिलाएं खेती तो करती है इसके साथ में सब्जियां भी उगाती है। तो क्यों ना महिलाएं सब्जियां तो उगाती है तो उसका उपयोग वह बेचने के लिए भी करें। जब सीजन होता है गर्मी का तो वहां पर आम काफी उगते हैं तो उनको वो कैरी के माध्यम से, आम के माध्यम से, आम का जूस बनाकर, इस तरह से प्रोडक्टिव वे में कैसे उसको बेच सकती है, उसको सोचते हुए महिलाएं काफी कुछ उद्योग कर सकती है, पापड़ बनाने से लेकर अचार तक। इस तरह के छोटे-छोटे उद्योग हैं वो हम सोचते नहीं हैं लेकिन यदि हम उसको शुरुआत करेंगे तो वो काफी आगे प्रगति को लेकर जाएगा।
बिल्कुल आपने सही कहा क्योंकि हम देखते हैं कि हमारे आसपास स्थानीय स्तर पर ऐसे कई व्यवसाय हैं जो महिलाएं घर बैठे कर सकती हैं और अपनी आय को और अपने आप को आत्मनिर्भर बना सकती हैं। बस उन्हें यह दृढ़ निश्चय करना होगा क्योंकि हम देखते हैं कि महिलाएं कोई भी कार्य शुरू करने से पहले उसके सकारात्मक और नकारात्मक पहलू दोनों एक साथ सोचती हैं। ऐसे में हम देखते हैं कि बहुत सी बार महिलाओं का जो नकारात्मक पहलू है वो उन पर हावी हो जाता है और महिलाएं कुछ अच्छा करने से पहले जहां रहती हैं वहीं की वहीं रह जाती हैं। ऐसे में महिलाओं को चाहिए कि जब भी वह कोई कार्य शुरू करें तो उसे सकारात्मक सोच के साथ शुरू करें और सकारात्मक सोच के साथ पूरी तरीके से योजना बनाएं, आस-पड़ोस के लोगों से, अपने घर परिवार के सदस्यों से सहयोग लेकर कार्य करें ताकि उनका जो कार्य है, उनका जो व्यवसाय है वह प्रगति को प्राप्त करें। तो जैसा कि मैम हमारी आपसे अब बातें ढेर सारी हो गई हैं। तो अंत में आप कार्यक्रम के माध्यम से हमारी महिलाओं को क्या संदेश देना चाहेंगी?
मैं अपनी महिला साथियों को यही संदेश देना चाहती हूं कि हमारे जो छोटे-छोटे से प्रयास हैं वो काफी बदलाव को लेकर आते हैं। हम सोचते हैं एक छोटी सी चीज है क्या बदलाव करेगी। लेकिन हम जब शुरुआत करते हैं तो आगे चलकर वो एक बड़ा बदलाव को लेकर आती है। जब महिलाएं अपने अंदर के हुनर को, अपने मेहनत को एक व्यवसाय के रूप में अगर वह शुरू करेगी तो आत्मनिर्भर तो वो बनेगी लेकिन एक मजबूती, जो बोलते हैं हम आर्थिक मजबूत, वह आर्थिक रूप से मजबूत हो पाएगी, अपना तो सोच पाएगी लेकिन अपने परिवार के लिए भी आगे चलकर वह बहुत कुछ कर सकती है। तो इससे ना केवल परिवार की आय बढ़ती है बल्कि महिलाओं में भी आत्मविश्वास बढ़ता है, समाज में उनकी पहचान भी बनती है। इसलिए हमें चाहिए कि महिलाएं आगे बढ़े, उनके कौशल को वो पहचाने, यह बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है। तो यदि वह कौशल को पहचाने गी तो वह उससे प्रोत्साहित होगी और अन्य महिलाओं को भी प्रोत्साहित कर पाएगी।
बिल्कुल मैम, आपने सही कहा। तो इस तरीके से हमारी महिलाएं जो हैं वो कार्यक्रम के माध्यम से बहुत अच्छी बातों को समझ पाई होंगी। तो मैम आपका हम धन्यवाद करना चाहेंगे कि आप हमारे कार्यक्रम से जुड़ी और आपका कीमती समय आपने हमें दिया।
धन्यवाद!